Pulwama Terror attack 2019:
जम्मू-कश्मीर में सेना पर बीते 30 सालों में सबसे बड़ा हमला, 40 जवान शहीद हुए
उरी से भी बड़ा आतंकी हमला

पुलवामा के अवंतीपुरा में सीआरपीएफ जवानों पर हुआ फिदायीन हमला 18 सितंबर 2016 में उरी हमले से कहीं ज्यादा बड़ा है। उरी में 19 जवान शहीद हो गए थे, जबकि आज हुए हमले में अब तक 20 जवानों की मौत की खबर है। आइए बताते हैं कैसा था उरी हमला....
18 सितंबर 2016 को सुबह साढ़े 5 बजे जम्मू-कश्मीरके उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ था जिसमें 19 जवान शहीद हो गए। सैन्य बलों की कार्रवाई में हमलावर सभी चार आतंकी मारे गए। इस हमले को भारतीय सेना पर बीते 30 सालों में किया गया सबसे बड़ा हमला था। सीमा पार बैठे आतंकियों ने सेना के कैंप पर फिदायीन हमला किया था। हमलावरों ने निहत्थे और सोते हुए जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, ताकि ज्यादा से ज्यादा जवानों को मारा जा सके। इस हमले का बदला भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर लिया था, जिस पर एक फिल्म बनी उड़ी: द सर्जिकल स्ट्राइक।
आतंकियों के मंसूबे कुछ और थे...
सेना के सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों की पहले योजना थी कि निहत्थे और सोते हुए जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर ज्यादा से ज्यादा जवानों को मारा जाए। इसके बाद बटालियन हेडक्वार्टर के प्रशासनिक ब्लॉक में मेडिकल एड यूनिट में घुसकर वहां खूनखराबा किया जाए और इसके बाद अंत में ऑफिसर्स मेस में घुसकर खुद को उड़ा लेना। हालांकि पैरा स्पेशल फोर्सेज़ को प्रशासनिक ब्लॉक में उतारे जाने के फैसले की वजह से आतंकी अपने इन नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। सेना ने आतंकवादियों को प्रशासनिक ब्लॉक में ही सीमित कर दिया और तेजी से उन्हें खत्म कर दिया। कुछ ही घंटों के अंदर ही चारों आतंकियों को मार गिराया गया। आतंकवादियों ने बटालियन हेडक्वार्टर के फ्यूल डिपो में ग्रेनेड फेंककर आग लगा दी थी। इससे लगभग सौ मीटर के दायरे में भीषण आग लग गई, जिसमें अधिकतर सैनिकों की जान चली गई। आतंकवादियों के पास से बरामद नक्शों में पश्तून भाषा में लिखी मार्किंग्स भी मिली थी।
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